इस आसन में शरीर की स्थिति मुर्दे की समान होती है जब आपका शरीर और मन पूरी तरह थक गए हो आपको कुछ काम करने की इच्छा ना हो किसी से बात करने का मन ना हो आप निराश अथवा परेशान हो तो आप इस आशंका आश्रय लीजिए और सही ढंग से इसे कीजिए आपकी परेशानियां दूर हो जाएंगी और आपका शरीर और मन फूल की तरह समान हल्का और तरोताजा हो उठेगा। अंग अंग ढीला छोड़कर शरीर और मस्तिष्क को इसमें पूर्णता की स्थिति में लाया जाता है
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| शवासन |
विधि
भूमि पर दरी या कंबल बिछा कर पीठ के बल चित्र लेट जाइए। दोनों पैर फैले हुए हो और उनमें 1 फीट की दूरी हो पैर ढीला छोड़ दे। बाहों को दोनों बगल में शरीर से थोड़ा हटाकर फैलाएं और हाथों को ढीला छोड़ दें हथेली ऊपर की ओर हो और उंगलियां ढीली छोड़ने पर जैसे रहे वैसे ही रहने दीजिए इसके बाद स्वाभाविक गति में सांस लेते रहिए आंखें बंद करके ढीली छोड़ दे
शासन में ध्यान।
शवासन की अवस्था ने मस्तिक के विचारों को शांत करने का कोशिश करें अपनी सांसो पर अपने ध्यान को रखें जिसमें काम संबंधी कोई भाव नहीं हो इस आसन में एक समय ऐसा आएगा जब शरीर हल्का-फुल्काा लगेग और चेतना अनु मुक्त सा लगेगा
लाभ
यह शरीर को पूर्णतया विश्राम प्रदान करता है इसे थकावट दूर होती है मानसिक तनाव दूर होता है मन मस्तिक हल्का और प्रफुल्लित होता है
सावधानियां
शासन में ध्यान लगाते समय शरीर और मस्तिष्क पर कोई भी दबाव ना डालें ध्यान में भी स्वाभविक रूप से एकगरचित्त को प्राप्त करने का प्रयत्न करें उत्तर दिशा की ओर सिर करके शासन ना लगाएं अच्छा होगी सिरपुर दिशा में रख
स्वासन करवट लेट कर भी किया जा सकता है लेकिन सबसे ज्यादा लाभ चित लेटना है

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